बिहार विधानसभा के विशेष सत्र में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकर ने विश्वास मत हासिल जिसके बाद अब राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। शनिवार सुबह सुबह सीएम सम्राट ‘सीएम आवास’ यानी 1 अणे मार्ग पहुंचे। वहां उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह से मुलाकात की। फिलहाल नीतीश कुमार 1 अणे मार्ग में रह रहे हैं। नीतीश कुमार से सम्राट चौधरी की गर्मजोशी से मुलकात हुई और मुख्य रूप से सम्राट को फ्लोर टेस्ट जीतने की नीतीश कुमार ने बधाई दी। इस दौरान इस दौरान राज्य मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी चर्चा होने की खबर है। 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री और जदयू के विजय चौधरी और विजेंद्र यादव ने मंत्री पद की शपथ ली थी। बाद में दोनों ने उप मुख्यमंत्री का पदभार संभाला। हालांकि अभी तक मंत्रिमंडल विस्तार नहीं हुआ है। इस कारण बिहार की पहली भाजपा सरकार फ़िलहाल तीन लोगों यानी सम्राट, विजय और विजेंद्र यादव के रूप में भी चल रही है। आज हुई नीतीश और ललन से सीएम सम्राट चौधरी की मुलाकात में आगे किस आधार पर मंत्रिमंडल विस्तार को अंतिम रूप दिए जाए उस पर कुछ चर्चा होने की संभावना जताई गई है। दरअसल, माना जा रहा है कि बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार 4 मई के बाद ही होगा। इस मुख्य कारण पश्चिम बंगाल में शेष बचा अंतिम चरण का विधानसभा चुनाव का मतदान है जो 29 अप्रैल को होगा। उसके बाद 4 मई को असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में एक साथ चुनाव परिणाम आएगा। मान जा रहा है कि चुनाव नतीजों के बाद बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार होगा जो 5 या 6 मई को हो सकता है। गौरतलब है कि पिछले दिनों सम्राट चौधरी ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की थी। हालांकि गृह मंत्री अमित शाह से उनकी मुलाकात नहीं हुई थी क्योंकि वे पश्चिम बंगाल चुनाव में प्रचार में व्यस्त थे। ऐसे में बिहार मंत्रिमंडल का विस्तार होने के पहले माना जा रहा है कि एक बार सम्राट की अमित शाह से मुलाकात हो सकती है। बिहार में पहली बार बनी भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल में एनडीए के सभी दलों की सम्मानजनक हिस्सेदारी होने के संकेत हैं। माना जा रहा है कि जिस आधार पर पिछली नीतीश सरकार में मंत्री पदों के बंटवारा भाजपा, जदयू, हम, लोजपा (रा) और रालोमो में हुआ था इस बार भी वही फार्मूला लागू रहेगा। हालांकि कुछ विभागों में फेरबदल की गुंजाइश है जिससे भाजपा के कुछ विभाग जदयू कोटे के मंत्रियों के हाथों में जा सकता है। वहीं एनडीए के सभी घटक दलों द्वारा इस बार कुछ नए चेहरों को मंत्री बनाकर नए किस्म की राजनीतिक संदेश को देने की कोशिश की जा सकती है। इसमें नीतीश कुमार के बेटे निशांत के साथ दिखने वाले जदयू के 14 युवा विधायकों की टीम के कुछ सदस्य भी हो सकते हैं।
