महंगाई एक और झटका आम लोगों को लगा है और एक बार फिर से गैस की कीमतों में बढ़ोत्तरी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने गुरुवार से एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमत में 16 प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। इसके साथ ही 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में भी 62.50 का इजाफा किया गया है। हालांकि, घरेलू रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। तेल कंपनियों के मुताबिक, घरेलू एयरलाइंस के लिए ATF की कीमत अब 137 प्रति लीटर हो गई है, जो पहले 121 प्रति लीटर थी। इससे पहले सितंबर में भी ATF के दाम में 6.28 प्रति लीटर यानी करीब 5.46 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी। अगस्त में भी इसकी कीमत 5 प्रति लीटर बढ़ाई गई थी। ATF विमानन कंपनियों के संचालन खर्च का एक बड़ा हिस्सा है। यह एयरलाइंस की कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट का करीब 40 फीसदी तक हो सकता है। ऐसे में ईंधन की कीमत बढ़ने से एयरलाइंस की लागत पर सीधा असर पड़ता है। कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ किराये के जरिए यात्रियों तक पहुंचा सकती हैं, हालांकि इसका अंतिम असर एयरलाइन की कीमत नीति और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा। कमर्शियल LPG के 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत में भी 62.59 की बढ़ोतरी की गई है। इससे पहले सितंबर में कमर्शियल LPG 9.50 प्रति सिलेंडर महंगा हुआ था। हालांकि जुलाई और अगस्त में इसके दाम में क्रमशः 183.50 और 192 की बड़ी कटौती की गई थी।जून में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी के कारण कमर्शियल LPG के दाम रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए थे। फरवरी से जून के बीच 19 किलो के सिलेंडर की कीमत में कुल 1,373 की बढ़ोतरी हुई थी और यह 1,740.50 से बढ़कर 3,113.50 तक पहुंच गई थी। इसके बाद जुलाई और अगस्त में कीमतों में कमी आई। घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत दी गई है। 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 942 पर ही बनी हुई है। पश्चिम एशिया संकट के दौरान आपूर्ति प्रभावित होने और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में तेजी के बीच मार्च से जून के बीच घरेलू LPG के दाम में 89 प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी। वहीं, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। मई में दोनों ईंधनों के दाम करीब 7.50 प्रति लीटर बढ़ाए गए थे। तेल कंपनियां ATF और LPG की कीमतों की समीक्षा हर महीने की पहली तारीख को करती हैं। इन कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के साथ-साथ रुपये और डॉलर की विनिमय दर का भी असर पड़ता है। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय कर, खासकर VAT, के कारण वास्तविक कीमतों में अंतर हो सकता है।
