पटना, अचानक हृदय गति रुकने जैसी आपात स्थिति में जीवन बचाने के लिए सीपीआर प्रशिक्षण को व्यापक स्तर पर पहुंचाने के उद्देश्य से जय प्रभा मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटना की ओर से बिहार लोक भवन के कर्मचारियों के लिए विशेष सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लोक भवन के 200 से अधिक कर्मचारियों तथा महिला इमदाद समिति के सदस्यों ने भाग लिया और विशेषज्ञों की देखरेख में सीपीआर की व्यावहारिक जानकारी एवं प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन तथा लेडी गवर्नर श्रीमती सबिहा हसनैन ने सक्रिय रूप से भाग लिया और सीपीआर प्रशिक्षण के महत्व की सराहना की। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव श्री संजय कुमार, ओएसडी श्री सुमन कुमार, डॉ. रवि शंकर सिंह, डॉ अजय कुमार सिन्हा , डायरेक्टर – प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी, डॉ दीपाश्री ठाकुर एवं मेदांता पटना के चिकित्सक एवं कर्मचारी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने कहा कि सीपीआर जैसी जीवनरक्षक तकनीक की जानकारी केवल चिकित्सा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि बिहार के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में नियमित रूप से सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं और इसे प्रत्येक कॉलेज में त्रैमासिक कार्यक्रम के रूप में शुरू किया जाए। उन्होंने मेदांता पटना को बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की दिशा में पहल करने के लिए आमंत्रित किया । राज्यपाल ने यह भी कहा कि आने वाले समय में सीपीआर प्रशिक्षण को शिक्षा व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा बनाने की दिशा में प्रयास किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थी आपात स्थिति में किसी का जीवन बचाने में सक्षम हो सकें। राज्यपाल ने युवाओं को सीपीआर जागरूकता अभियान से जोड़ने के लिए विश्वविद्यालय एवं कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए सर्वश्रेष्ठ सीपीआर जागरूकता रील को ₹50,000 का पुरस्कार देने की घोषणा भी की। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सीपीआर जैसे जीवनरक्षक कौशल के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। डॉ. रवि शंकर सिंह, मेडिकल डायरेक्टर, मेदांता पटना ने कहा कि पिछले 5 वर्षों से सीपीआर प्रशिक्षण मेदांता पटना के प्रमुख जनजागरूकता कार्यक्रमों में शामिल रहा है। इस अवधि में अस्पताल ने बिहार के 44 शहरों एवं कस्बों में 305 सीपीआर गतिविधियों के माध्यम से 27,203 से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य सीपीआर को केवल अस्पताल तक सीमित न रखकर स्कूलों, कार्यस्थलों, संस्थानों और समुदायों तक पहुंचाना है।उन्होंने कहा कि राज्यपाल द्वारा शैक्षणिक संस्थानों में नियमित सीपीआर प्रशिक्षण को बढ़ावा देने का सुझाव इस अभियान को और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मेदांता पटना भविष्य में भी विभिन्न संस्थानों के साथ मिलकर इस जीवनरक्षक कौशल को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ. अजय कुमार सिन्हा, डायरेक्टर – प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी, मेदांता पटना ने कहा कि कार्डियक अरेस्ट में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं और उस समय सही तरीके से किया गया सीपीआर जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसलिए सीपीआर की जानकारी केवल स्वास्थ्यकर्मियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि आम लोगों, युवाओं और विद्यार्थियों को भी इसका व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलना चाहिए।
