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सांसद पप्पू यादव की ‘Y प्लस’ कैटेगरी सुरक्षा बहाल, हाई कोर्ट ने बिहार सरकार से कहा- आप मनमानी नहीं कर सकते

पटना हाई कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में बिहार सरकार को निर्देश दिया है कि पूर्णिया के निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को पहले से प्राप्त Y प्लस कैटेगरी की सुरक्षा बहाल की जाए. साथ ही हाई कोर्ट ने उस आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसके तहत उनकी सुरक्षा Y प्लस कैटेगरी से घटाकर Y कर दी गई थी. जस्टिस जितेंद्र कुमार ने सांसद पप्पू यादव की याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश जारी किया. पप्पू यादव ने कोर्ट में बिहार सरकार के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी सुरक्षा में कमी करते हुए Y कैटेगरी की कर दी गई थी. हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आप अपनी मनमानी नहीं कर सकते, उनकी Y प्लस कैटेगरी सुरक्षा को बहाल किया जाए. पप्पू यादव को कांग्रेस के करीबी नेताओं में माना जाता है. उन्होंने अपनी सुरक्षा बढ़ाने की मांग की थी. उन्होंने स्थानीय गैंगस्टर छोटू यादव और कुख्यात माफिया सरगना लॉरेंस बिश्नोई से खतरे का हवाला देते हुए राज्य की नई एनडीए सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय को कई प्रतिवेदन दिए थे. हाई कोर्ट ने 14 मई को अपने दिए आदेश में कहा कि राज्य गृह विभाग की ओर से पिछले साल 23 सितंबर को पप्पू यादव की सुरक्षा श्रेणी को Y प्लस से घटाकर Y किया जाना वस्तुनिष्ठ सामग्री और निष्पक्षता के पालन पर आधारित नहीं था. अपने फैसले में हाई कोर्ट ने राज्य के गृह सचिव को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को पहले की तरह Y प्लस श्रेणी की सुरक्षा फिर से उपलब्ध कराई जाए. जज ने अपने फैसले में आगे कहा कि राज्य सरकार ने सांसद की सुरक्षा कम करने से पहले न तो उनसे कोई राय ली और न ही उन्हें इस फैसले के बारे में बताया. साथ ही “फैसला लेते समय ‘प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों’ का भी पालन नहीं किया गया, जिस व्यक्ति को सुरक्षा (याचिकाकर्ता) मिली, उससे कोई राय नहीं ली गई, ताकि सक्षम अधिकारी उनकी जांच या पुष्टि कर सकें.” पटना हाई कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि ऐसे सरकारी फैसले जो किसी व्यक्ति की आजादी और सुरक्षा पर असर डालते हैं, वे निष्पक्षता और ठोस तथ्यों पर आधारित होने चाहिए. हमारा देश एक संवैधानिक लोकतंत्र है. यहां संविधान और उसके तहत बने कानूनों की सर्वोच्चता है. प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत और कानून की उचित प्रक्रिया हमारी कानूनी व्यवस्था का एक अभिन्न अंग हैं.” सुनवाई के दौरान, पप्पू यादव की ओर से पेश वकील ने यह दलील दी थी कि बिहार सरकार ने 9 अगस्त, 2025 को अपने एक आदेश के जरिए उनकी सुरक्षा को ‘Y’ श्रेणी से बढ़ाकर ‘Y प्लस’ कैटेगरी कर दिया था, लेकिन तब उन्हें इस बारे में कभी बताया नहीं गया. हालांकि, करीब 6 हफ्ते बाद राज्य सरकार ने अगले ही महीने उनकी सुरक्षा को फिर से घटाकर ‘Y’ कैटेगरी में कर दिया, और इस बार भी उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई.

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