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जिनकी पूंजी शराब कंपनियों में लगी है वो कर रहे शराबबंदी के दुष्प्रभाव का फर्जी दावा: जद (यू0)

शराबबंदी पर सवाल उठाने से पहले बताएं—शराब कारोबार से जुड़े वित्तीय हितों का क्या है हिसाब?

13 अगस्त 2026, पटना।

             जद (यू0) विधान पार्षद सह मुख्य प्रदेश प्रवक्ता श्री नीरज कुमार एवं प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती पूजा पैट्रिक ने संयुक्त रुप से प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने एक निजी एजेंसी द्वारा बिहार में कराए गए शराबबंदी पर सर्वेक्षण को लेकर कंपनी पर तीखा हमला बोला और कंपनी के शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारियों पर गंभीर सवाल उठाए।

             उन्होंने कहा कि जिस निजी संस्था के पदाधिकारियों अथवा सदस्यों के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ऐसे वित्तीय संस्थानों से संबंध हों, जिनकी बैंकिंग सुविधाएं शराब कारोबार से जुड़ी कंपनियों को उपलब्ध हैं, उस संस्था द्वारा बिहार की शराबबंदी पर किए गए सर्वेक्षण की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

             उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण कराने वाली निजी संस्था एनसीएईआर की गवर्निंग बॉडी में एचडीएफसी बैंक के चेयरपर्सन दीपक एस पारीख शामिल हैं जिनका पैसा शराब की कंपनी में लगा है। वहीं सिंगरेट बनाने वाली कंपनी आईटीसी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक संजीव पुरी इस कंपनी के बोर्ड मेंबर हैं।

             विपक्ष पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि ये दावा करना कि बिहार का खजाना खाली है  महज एक राजनीतिक अफवाह है। जबकि सच्चाई ये है कि  वित्तीय वर्ष 2026-27 में बिहार का कुल बजट लगभग ₹3.48 लाख करोड़ का है।  अगर सीएजी की रिपोर्ट 2015-16 के हिसाब से आकलन किया जाए तो excise से आय ₹3,141.75 करोड़ था यानी कुल बजट का सिर्फ 3.27%। वर्तमान समय में राज्य का कुल बजट 3.48 लाख करोड़ है। इसके मुताबिक वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी एक्साइज से आय 3.27 फीसदी यानी कुल 11 हजार 380 करोड़ अनुमान किया जा सकता है। तो ऐसे में ये दावा करना कि राज्य को आर्थिक नुकसान हो रहा है, वास्तविकता से परे है।

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