तमिलनाडु की राजनीति में एक नया चेप्टर जुड़ गया है, जहां अभिनेता से नेता बने थलपति विजय ने अपने ‘सुपर डेब्यू’ से सभी को चौंका दिया है. जी हां, अपनी पहली ही चुनावी परीक्षा में विजय ने ऐसा शानदार प्रदर्शन दर्ज किया है, जिसकी तुलना एमजी रामचंद्रन और एनटी रामाराव की ऐतिहासिक शुरुआत से की जा रही है. राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर विजय की जीत होती है, तो वो सिर्फ एक सीट की नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है. विजय की पार्टी ने सीमित संसाधनों और कम समय में जिस तरह जनता के बीच पकड़ बनाई, वो चौंकाने वाला रहा. युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं का उन्हें भरपूर समर्थन मिला. यही वजह रही कि उन्होंने अपने विरोधियों को कड़ी टक्कर देते हुए काफी बेहतरीन बढ़त हासिल की.विधानसभा चुनाव के रिजल्ट के अब तक के आंकड़े देखें तो थलापति विजय की तुलना तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन से की जा सकती है, जो भारतीय राजनीति के इतिहास में राजनीति में आने वाले पहले फिल्मी एक्टर थे. रामचंद्रन ने 1972 में अन्नाद्रमुक पार्टी बनाकर 1977 का चुनाव लड़ा और अपने गठबंधन को 144 सीटें दिलाई. उनकी पार्टी ने अकेले 130 सीटें जीतीं और 33.5% वोट शेयर के साथ सरकार बनाई. रामचंद्रन मुख्यमंत्री बने और बेहद शानदार तरीके से सरकार चलाई. आंध्र प्रदेश में एनटी रामाराव की एंट्री भी सबसे धमाकेदार रही थी. 1982 में उन्होंने ‘तेलुगु देशम पार्टी’ पार्टी बनाई और 9 महीने बाद ही उन्होंने 1983 का चुनाव लड़ा. 46.3% वोट शेयर के साथ 201 सीटें जीतकर कांग्रेस के 27 साल पुराने किले को ध्वस्त किया था. एमजीआर और एनटी रामाराव की तरह एक्टर विजय को भी अगर इतना ही वोट शेयर और बहुमत के करीब सीटें मिल गईं तो वे इतिहास रच देंगे.
