गोरखपुर, 10 जून, 2024: पूर्वोत्तर रेलवे पर जल संचयन हेतु निरन्तर प्रयास किया जा रहा है। रेलवे प्रशासन द्वारा जल संरक्षण हेतु पूर्वोत्तर रेलवे के 36 स्थानों पर 50 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाये गए है तथा 18 अन्य स्थानों पर लगाने का कार्य प्रगति पर है।
मुख्यालय गोरखपुर में रेलवे अधिकारी क्लब, रेलवे सुरक्षा विशेष बल,रजही कैम्प, प्रमुख मुख्य इंजीनियर कार्यालय, प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी कार्यालय, उप मुख्य इंजीनियर गोरखपुर क्षेत्र/कार्यालय, रेलवे क्रिकेट स्टेडियम, सिगनल एवं दूरसंचार छात्रावास, रेलवे सुरक्षा बल प्रशिक्षण केन्द्र, बहुविषयक पद्धति प्रशिक्षण केन्द्र छात्रावास, ललित नारायण रेलवे चिकित्सालय, पूर्वोत्तर रेलवे बालक एवं पूर्वोत्तर रेलवे बालिका इण्टर कालेज, राजकीय रेलवे पुलिस लाइन, सीनियर सेकेेण्डरी स्कूल, ट्रांजिट हाउस, प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक कार्यालय, प्रमुख मुख्य विद्युत्त इंजीनियर कार्यालय, वरूणा रेलवे अधिकारी विश्रामालय, राप्ती रेलवे अधिकारी विश्रामालय, प्रधान वित्त सलाहकार कार्यालय में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाये गये हैं।
वाराणसी मंडल के मंडलीय रेलवे चिकित्सालय, मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, गाजीपुर सिटी रेलवे स्टेशन, सहायक मंडल इंजीनियर कार्यालय/सीवान, बनारस रेलवे स्टेशन, भटनी रेलवे स्टेशन, छपरा रेलवे स्टेशन, इज्जतनगर मंडल के कासगंज एवं बरेली सिटी रेलवे स्टेशन, कासगंज कोचिंग डिपो, लालकुआं कोचिंग डिपो तथा लखनऊ के मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, अवध रनिंग रूम/लखनऊ में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाये गये है। वाराणसी मंडल के आजमगढ़, बलिया, बेल्थरा रोड, देवरिया सदर, मऊ, खोरासन रोड, वाराणसी सिटी स्टेशनों एवं इज्जतनगर मंडल के काठगोदाम, हल्द्वानी, काशीपुर, रूद्रपुर सिटी, फर्रूखाबाद, कन्नौज, पीलीभीत, कासगंज एवं लालकुआं स्टेशन तथा लखनऊ मंडल के लखनऊ स्टेशन, ऐशबाग कोचिंग डिपो में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का कार्य प्रगति पर है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लग जाने से भू-जल के स्तर में सुधार होगा। जिससे पर्यावरण को हरा-भरा बनाये रखने में मदद मिलेगी। फलस्वरूप वातावरण स्वच्छ एवं सुन्दर होगा।
इसके अतिरिक्त मानसून के दौरान नदियों के जलस्तर की निगरानी हेतु पूर्वोत्तर रेलवे के विभिन्न खण्डों पर स्थित 18 महत्वपूर्ण पुलों पर वाटर लेवल माॅनिटरिंग सिस्टम लगाये गये हंै, जिसमें औंड़िहार-वाराणसी खण्ड के मध्य गोमती नदी पर बने पुल संख्या-137, वाराणसी-प्रयागराज के मध्य गंगा नदी पर बने पुल संख्या-111, सलेमपुर-इंदारा के मध्य घाघरा नदी पर बने पुल संख्या-31, छपरा-फेफना के मध्य घाघरा नदी पर बने पुल संख्या-16, नरकटियागंज-कप्तानगंज के मध्य गंडक नदी पर बने पुल संख्या-50, सीवान-भटनी के मध्य छोटी गंडक नदी पर बने पुल संख्या-119, इज्जतनगर-कासगंज के मध्य कछला (गंगा) नदी पर बने पुल संख्या-409, लालकुआं-काशीपुर के मध्य कोसी नदी पर बने पुल संख्या-104, पीलीभीत-बीसलपुर के मध्य देवहा नदी पर बने पुल संख्या-270, कासगंज-मथुरा के मध्य यमुना नदी पर बने पुल संख्या-554, बढ़नी-गोंडा के मध्य घाघरा नदी पर बने पुल संख्या-151, मनकापुर-अयोध्या के मध्य सरयू नदी पर बने पुल संख्या-18, गोरखपुर-मनकापुर के मध्य ककरा नदी पर बने पुल संख्या-182 एवं राप्ती नदी पर बने पुल संख्या-184, गोरखपुर-आनन्दनगर के मध्य रोहिन नदी बने पुल संख्या-04, नानपारा-दुदवा के मध्य बबई नदी पर बने पुल संख्या-55 एवं दुदवा-मैलानी के मध्य शारदा नदी पर बने पुल संख्या-97 तथा गोंडा-बुढ़वल के मध्य बने पुल संख्या-391 सम्मिलित है। वाटर लेवल माॅनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से जल स्तर के घटने-बढ़ने की सटीक जानकारी एस.एम.एस. के माध्यम से मिलती रहती है, जिससे मानसून के दौरान जल स्तर की माॅनिटरिंग करना आसान होता है। इससे ट्रेनों के सुचारू रूप से संचलन में काफी मदद मिलती है।
