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रेलवे 17 जुलाई को शुरू करेगा देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जानें रूट और किराया समेत सबकुछ

भारत दुनिया का चौथे नंबर का रेल नेटवर्क वाला देश है. जहां हर दिन 25 हजार से ज्यादा ट्रेनें चलती हैं, इनमें से करीब 13500 ट्रेनें लंबी दूरी की है. इनसे हर दिन करीब 2.4 करोड़ लोग सफर करते हैं. भारतीय रेलवे लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. अब रेलवे जल्द ही हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाला है. प्रधानमंत्री पीएम मोदी  17 जुलाई को भारत की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे. यह देश में साफ-सुथरे और टिकाऊ ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है. यह ट्रेन हरियाणा में जींद और सोनीपत के बीच चलेगी. जिसमें हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा. इस ट्रेन से लगभग जीरो प्रदूषण होता है. बता दें कि देश की पहले हाइड्रोजन ट्रेन की लॉन्चिंग को भारत के ‘ग्रीन ट्रांसपोर्ट मिशन’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के लिए एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है. यह पर्यावरण के अनुकूल और देश में बनी रेल टेक्नोलॉजी विकसित करने की भारत की कोशिशों को दिखाता है. पीएम मोदी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को 17 जुलाई को लॉन्च करेंगे. भारतीय रेलवे ने हाइड्रोजन ट्रेन का किराया बहुत कम रखा है; टिकट की कीमत 5 से 25 रुपये के बीच होने की उम्मीद है. माना जा रहा है कि ये ट्रेन जींद-सोनीपत के लगभग 90 किलोमीटर लंबे रूट को सिर्फ एक घंटे में पूरा कर लेगी. इससे यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा, क्योंकि मौजूदा डीजल मल्टीपल यूनिट सर्विस से इसी सफर को तय करने में करीब दो घंटे का समय लगता है. बताया जा रहा है कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन से एक साथ करीब 2500 यात्री सफर कर सकेंगे. जिससे यह ट्रेन न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल, बल्कि तेज और किफायती यात्रा का विकल्प भी बन जाएगी. जिसका इस्तेमाल फिलहाल हरियाणा में किया जाएगा. उसके बाद चरणबद्ध तरीके से देश के दूसरे राज्यों में भी हाइड्रोजन ट्रेन को चलाया जाएगा. बता दें कि हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी से चलने वाली यह ट्रेन 1,200-किलोवाट के हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम से लैस होगी. इसमें डीजल के बजाय हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच होने वाली केमिकल प्रोसेस से बिजली बनाई जाएगी. इस पूरी प्रोसेस में सिर्फ भाप और गर्मी निकलती है, जिससे धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता. एक बार हाइड्रोजन भरने के बाद, यह ट्रेन लगभग 250 किलोमीटर तक चल सकेगी. बता दें कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को बनाने में लगभग 89 करोड़ रुपये की लागत आई है. हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन को भारतीय रेलवे के लिए एक बड़ी उपलब्धि और साफ-सुथरी मोबिलिटी की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भविष्य में दूसरे रूटों पर भी ऐसी ही हाइड्रोजन ट्रेनें चलाई जा सकती हैं, जिससे डीजल पर निर्भरता कम होगी, ईंधन का खर्च घटेगा और पर्यावरण संरक्षण की कोशिशों को मजबूती मिलेगी. इस लॉन्च के साथ, 17 जुलाई भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा, जो रेल परिवहन में एक साफ-सुथरे और ज्यादा टिकाऊ दौर की शुरुआत होगी.

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