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भरत तिवारी केस: सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई CBI जांच की मांग, याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर मामले की सीबीआई जांच की मांग ठुकरा दिया है.सर्वोच्च अदालत ने याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की सलाह दी है. जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की वेकेशन बेंच ने आदेश दिया है. अर्जी सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने दायर की थी. याचिका में पूरे मामले की CBI जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी. याचिकाकर्ता व अधिवक्ता विशाल तिवारी ने कहा कि पुलिस ने कार्रवाई गैरकानूनी थी. पहले भी ऐसे मामले कई राज्यों में हुए हैं, जिससे संबंधित याचिकाएं यहां लंबित हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट जाएं. अदालत में याचिका के जरिए कहा गया है कि इस तरह के मामलों में कानून के शासन और लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है. याचिका में यह भी गुहार लगाई गई कि इस पूरे प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में गठित स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति की निगरानी में कराई जाए. 17 जून को बिहार के भोजपुर जिले में भरत तिवारी नाम के शख्स की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी. एनकाउंटर पर सवाल उठ रहे हैं. इसे लेकर बिहार में काफी बवाल भी हुआ. पुलिस द्वारा बल प्रयोग पर सवाल उठाए गए और स्वतंत्र जांच की मांग की गई. मामले को लेकर बिहार सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए. पुलिस के अनुसार, भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौती गांव निवासी भरत तिवारी 17 जून को उसे गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस टीम पर अवैध हथियार से गोलीबारी करने लगा. पुलिस के अनुसार, पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें तिवारी घायल हो गया और बाद में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई. हालांकि, भरत तिवारी के परिजनों का आरोप है कि भरत ने गोली चलाने से पहले आत्मसमर्पण कर दिया था और अपना हथियार भी फेंक दिया था. उनका दावा है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो से प्रतीत होता है कि पुलिस की गोलीबारी के समय वह निहत्था था. इस मामले में भरत तिवारी के परिवारवालों के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ था, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया गया. भोजपुर के SP राज ने भरत तिवारी के पिता और भाई के खिलाफ दर्ज मामला वापस लिया. SP ने ही FIR वापसी की जानकारी भरत की मांग आशा देवी को दी. मामले में भोजपुर जिले के शाहपुर थाना में पुलिस अधिकारी समेत तीन से चार पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया. उक्त एफआईआर भरत तिवारी के परिजनों के आवेदन पर दर्ज हुआ है, जिसमें जगदीशपुर के एसडीपीओ राजेश शर्मा, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार समेत अन्य पुलिसकर्मियों का नाम शामिल है.आज भरत भूषण तिवारी की श्रद्धांजलि सभा है. आयोजन समिति के अनुसार कार्यक्रम में करीब 25 हजार लोगों के शामिल होने की संभावना है. आयोजन समिति के सदस्य पंकज त्रिपाठी ने बताया कि भरत तिवारी की शहादत के बाद देशभर से लोगों का समर्थन मिल रहा है. इस बीच गांव में भरतपुर में आपका स्वागत है लिखे पोस्टर भी लगाए गए हैं. पंकज त्रिपाठी ने कहा कि ग्रामीणों ने अपने स्तर पर गांव को भरतपुर नाम दे दिया है और भरत तिवारी को शहीद मानते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार चाहे जो निर्णय ले, लेकिन लोगों के बीच भरत की पहचान अब एक शहीद के रूप में स्थापित हो चुकी है.

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