बिहार की सियासत में अपनी अलग पहचान बनाने वाले जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर अब औपचारिक तौर पर बिहार विधानसभा के सदस्य बन गए हैं। आज यानी सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार के कार्यालय कक्ष में उन्होंने विधायक पद की शपथ ली। शपथ के साथ ही चुनावी जीत के बाद शुरू हुई उनकी नई सियासी पारी को संवैधानिक पहचान मिल गई।सुबह करीब 10:30 बजे प्रशांत किशोर विधानसभा पहुंचे। गेट पर पहुंचते ही उन्होंने वहां मौजूद लोगों का अभिवादन किया। इसके बाद जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती समेत पार्टी के अन्य नेताओं के साथ वह विधानसभा अध्यक्ष के कक्ष में पहुंचे। निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्होंने विधायक पद की शपथ ली। प्रशांत किशोर की यह एंट्री इसलिए खास मानी जा रही है, क्योंकि उन्होंने बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा के मजबूत राजनीतिक गढ़ को ध्वस्त करते हुए जीत हासिल की। 3 अगस्त को हुई मतगणना में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा को 19,246 वोटों के बड़े अंतर से शिकस्त दी।चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रशांत किशोर को कुल 64,117 वोट मिले, जो कुल मतदान का 49.23 प्रतिशत था। वहीं भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा के खाते में 44,794 वोट, यानी 34.4 प्रतिशत मत आए। राजद प्रत्याशी रेखा गुप्ता 14,263 वोटों के साथ तीसरे पायदान पर रहीं। उन्हें 10.95 प्रतिशत वोट मिले। खास बात यह रही कि 2025 के आम चुनाव में रेखा गुप्ता इसी सीट पर दूसरे स्थान पर रही थीं। बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत को महज एक उपचुनाव का नतीजा नहीं, बल्कि बिहार की बदलती सियासी तस्वीर के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। करीब तीन दशक तक भाजपा के प्रभाव वाले बांकीपुर में जन सुराज की जीत ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इसी चुनावी मैदान में प्रशांत किशोर ने अपनी रणनीति, संगठन और जन सुराज के राजनीतिक प्रयोग को सीधे भाजपा के गढ़ में उतारा। नतीजा आया तो पुराने सियासी समीकरणों में खलबली मच गई। अब विधानसभा में उनकी मौजूदगी जन सुराज के लिए सिर्फ एक विधायक की एंट्री नहीं, बल्कि बिहार की मुख्यधारा की राजनीति में औपचारिक दस्तक मानी जा रही है।प्रशांत किशोर के सामने अब असली इम्तिहान विधानसभा के भीतर होगा। चुनावी मंच पर किए गए दावों, बदलाव के वादों और राजनीतिक मॉडल को सदन के भीतर किस तरह आवाज दी जाती है, इस पर सबकी नजर रहेगी। बांकीपुर की जीत ने उन्हें जनादेश दिया है, शपथ ने उन्हें सदन में जगह—अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि PK विधानसभा में सत्ता और विपक्ष के बीच अपनी सियासी लकीर कितनी गहरी खींच पाते हैं।
