प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8:30 बजे देश को संबोधित करेंगे. यह संबोधन ऐसे समय में हो रहा है जब संसद में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) विधेयक समेत तीन अहम बिल लोकसभा में पारित नहीं हो सके और सियासी टकराव अपने चरम पर पहुंच गया है. हालांकि प्रधानमंत्री के संबोधन के विषय को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि वह महिला आरक्षण बिल और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर अपनी बात रख सकते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संसद भवन में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में महिला आरक्षण बिल के गिरने पर गहरी निराशा जताई. उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को इस फैसले पर ‘जिंदगी भर पछताना पड़ेगा’ और उन्हें इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी होगी. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि विपक्ष अपनी इस स्थिति को छिपाने के लिए बहाने ढूंढ रहा है. गौरतलब है कि लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक… ये तीनों ही बिल जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा सके और गिर गए. संविधान संशोधन विधेयक पास कराने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है, जो इस बार सरकार को नहीं मिल पाया. यह पहली बार है जब 2014 से लगातार तीन कार्यकाल से सत्ता में रही भाजपा सरकार का कोई बड़ा संवैधानिक संशोधन बिल संसद में पास नहीं हो सका. इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने इसे एक महत्वपूर्ण सुधार पर सहमति बनाने का ‘चूका हुआ मौका’ बताया. वहीं, विपक्ष ने इसे अपनी जीत करार दिया है. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा कि यह ‘लोकतंत्र की जीत’ है और सरकार का लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास विफल हो गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस बिल के जरिए सत्ता में लंबे समय तक बने रहने की साजिश कर रही थी और महिलाओं का इस्तेमाल करना चाहती थी. प्रियंका गांधी ने यह भी मांग की कि 2023 में प्रस्तावित महिला आरक्षण विधेयक को संसद में पारित किया जाए, जिसमें जनगणना और परिसीमन के बाद आरक्षण लागू करने का प्रावधान है. अब सबकी नजरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आज रात होने वाले संबोधन पर टिकी हैं, जिसमें यह साफ हो सकता है कि सरकार इस मुद्दे पर आगे क्या रणनीति अपनाने वाली है और महिला आरक्षण को लेकर उसका अगला कदम क्या होगा.
