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मौत की सजा पाए 8 भारतीयों को दिखी उम्मीद की किरण, कतर कोर्ट ने कबूल कर ली यह अर्जी

नई दिल्ली- भारत के लिए एक राहत की खबर सामने आई है. दरअसल भारतीय नौसेना के आठ पूर्व अफसरों की याचिका को कतर की कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है. कतर की कोर्ट जल्द ही उनकी अपील पर सुनवाई कर सकती है. बता दें कि नौसेना के इन आठ पूर्व अफसरों को कतर में फांसी की सजा सुनाई गई है. दरअसल बीते 26 अक्तूबर 2023 को कतर की अदालत ने आठ भारतीयों को मौत की सजा सुनाई थी. जिसे भारत ने चौंकाने वाला फैसला बताया था और मामले में सभी कानूनी विकल्प तलाशने की बात कही थी.  कुछ दिनों बाद, मौत की सजा के खिलाफ अपील दायर की गई थी. कतर में जिन आठ पूर्व नौसैनिकों को मौत की सजा सुनाई गई है, उन पर जासूसी का आरोप था. एक ब्रिटिश अखबार ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि इन पर इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप था. वहीं एक अन्य मीडिया एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि आठों भारतीय पूर्व नौसैनिकों पर कतर के सबमरीन प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारी इजरायल से साझा करने का आरोप था. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था, कि भारत इस मामले पर कतर के अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहा है और सरकार भारतीय नागरिकों को सभी कानूनी और दूतावास संबंधी सहायता देना जारी रखेगी. कतर की अदालत ने अब अपील पर सुनवाई के लिए एक नई तारीख तय की है. नौसेना के जिन पूर्व अफसरों को कतर में फांसी की सजा दी गई है उनमें कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर पूर्णेन्दु तिवारी, कमांडर सुग्नाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और सेलर रागेश शामिल हैं. जिस कंपनी देहरा ग्लोबल के लिए ये भारतीय काम करते थे, उसके सीईओ खामिल अल आजमी ओमान एयरफोर्स के अफसर रह चुके हैं. आजमी को भी पहले हिरासत में लिया गया था लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया था.

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