यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित शुल्क यानी MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) के विरोध में मध्य प्रदेश में व्यापारियों ने कल यानी बुधवार (23 सितंबर) को नो UPI डे मनाने का ऐलान किया है. इसके लिए व्यापारिक संगठन व्हाट्सएप ग्रुप, सोशल मीडिया और बिजनेस एसोसिएशन के नेटवर्क के जरिए प्रदेशभर के कारोबारियों से जुड़ रहे हैं. इस दिन व्यापारी यूपीआई से कोई पैसा न लेंगे और न ही देंगे.यूपीआई स्कैनर को काले कपड़े से ढककर रखेंगे. भोपाल के व्यापरी संगठन इस मुहीम को पूरे मध्य प्रदेश में फैलाने के लिए WhatsApp ग्रुप और बिज़नेस-एसोसिएशन नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं. उनका मकसद है कि UPI ट्रांजैक्शन पर लगने वाले नए मर्चेंट चार्ज के खिलाफ राज्य-स्तरीय विरोध में कम से कम 10 लाख व्यापारी शामिल हों. अहिल्या चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने अन्य शहरों के व्यापारिक संगठनों से संपर्क करना शुरू कर दिया है, वहीं व्यापारियों को जागरूक करने और ग्राहकों को जानकारी देने के लिए दुकानों और बाजारों में पोस्टर बांटे जा रहे हैं. व्यापारियों के आंदोलन को प्रदेश के तमाम शहरों से समर्थन मिल रहा है. अकेले इंदौर में ही करीब दो लाख व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 125 से ज्यादा संगठनों ने इस आंदोलन का समर्थन किया है. चैंबर के संयुक्त सचिव अक्षय जैन ने कहा कि व्यापारी राज्य भर में संगठनों और अलग-अलग व्यापारियों तक पहुंचने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं. आंदोलन में भाग लेने वाले व्यापारियों से अनुरोध किया गया है कि वो उस दिन यूपीआई लेनदेन से बचें और भुगतान के अन्य तरीकों का इस्तेमाल करें. इंदौर के व्यापारियों ने क्यूआर स्कैनर और पेमेंट डिवाइस को काले कपड़े से ढकने का भी प्रस्ताव रखा है. चैंबर के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल और महासचिव गोपाल दास अग्रवाल ने मध्य प्रदेश के प्रमुख व्यापार और औद्योगिक संगठनों से इसमें शामिल होने की अपील की है. इसमें सराफा, कपड़ा कारोबारी, लोहा व्यापारी, प्लाईवुड, सेनेटरी, चाय किराना, पेट्रोल-डीजल व्यापारी जैसे तमाम संगठन शामिल हैं.व्यापारियों का कहना है कि वो डिजिटल भुगतान का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि ज़्यादा कीमत वाले यूपीआई ट्रांज़ैक्शन स्वीकार करने पर लगने वाली अतिरिक्त लागत का विरोध कर रहे हैं. जिसे कम मुनाफे वाले व्यवसायों को या यह लागत खुद उठानी पड़ सकती है, यानकद में भुगतान की ओर बढ़ना पड़ सकता है, या फिर कीमतों में इसे जोड़ना पड़ सकता है. व्यापारियों ने यूपीआई भुगतान पर लग रहे इस शुल्क को महंगाई बढ़ाने वाला करार दिया है. व्यापारियों का कहना है कि यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाया गया तो इसका सीधा असर व्यापार की लागत और अंततः ग्राहकों की जेब पर पड़ सकता है. 15 अक्टूबर से नया MDR रूल पूरे देश में लागू हो रहा है.
